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ऐ हमसफ़र अब कुछ इस कदर थाम ले हाथ मेरा

बोहोत लोग आये इस ज़िन्दगी में, कुछ को हमने छोड़ा कुछ हमें छोड़कर चल दिए, ऐ हमसफ़र अब कुछ इस कदर थाम ले हाथ मेरा, चाह कर भी खुदा हमें जुदा न कर सके जीवनभर के लिए। - यशपालसिंह जडेजा (Written on 19/01/2014 12:10am)