Monday, January 20, 2014

ऐ हमसफ़र अब कुछ इस कदर थाम ले हाथ मेरा

बोहोत लोग आये इस ज़िन्दगी में,
कुछ को हमने छोड़ा कुछ हमें छोड़कर चल दिए,
ऐ हमसफ़र अब कुछ इस कदर थाम ले हाथ मेरा,
चाह कर भी खुदा हमें जुदा न कर सके जीवनभर के लिए।

- यशपालसिंह जडेजा
(Written on 19/01/2014 12:10am)

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